नाना पाटेकर के निधन से फिर ताजा हुईं नर्मदा घाटी की यादें, : 21 दिसंबर 1996 की आमसभा में उमड़ा था जनसैलाब, बाबा आमटे की मौजूदगी से जुड़ी हैं तस्वीरें; तीन दशक पुराने नर्मदा बचाओ आंदोलन के दौर की यादें फिर हुईं जीवंत
Shiv Kumar Upwal
निसरपुर,धार 9 अक्टूबर 2026। दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर के बीच बड़वानी जिले के नर्मदा तट से जुड़ी करीब तीन दशक पुरानी यादें एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं। 21 दिसंबर 1996 को छोटी कसरावद में आयोजित नर्मदा बचाओ आंदोलन की आमसभा की बताई जा रही पुरानी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद नर्मदा घाटी में चले जनआंदोलन के उस दौर की यादें फिर ताजा हो गई हैं, जब बांध निर्माण, विस्थापन और प्रभावित परिवारों के अधिकारों को लेकर पूरे क्षेत्र में व्यापक बहस चल रही थी।

बताया जा रहा है कि छोटी कसरावद में आयोजित इस आमसभा में प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता बाबा आमटे भी शामिल हुए थे। तस्वीरों में उस समय के जनआंदोलन से जुड़े लोगों और स्थानीय ग्रामीणों की मौजूदगी उस दौर के सामाजिक संघर्षों की कहानी बयां करती है। नर्मदा घाटी का यह क्षेत्र लंबे समय तक विस्थापन, पुनर्वास और स्थानीय लोगों के अधिकारों से जुड़े सवालों को लेकर देशभर में चर्चा का केंद्र रहा।

नाना पाटेकर की पहचान केवल एक सशक्त अभिनेता के रूप में ही नहीं, बल्कि सामाजिक मुद्दों के प्रति संवेदनशील व्यक्तित्व के तौर पर भी रही है। उनके निधन के बाद देशभर में उन्हें याद किया जा रहा है। इसी बीच छोटी कसरावद की इन पुरानी तस्वीरों ने नर्मदा तट से जुड़ी उनकी स्मृतियों को फिर चर्चा में ला दिया है।
21 दिसंबर 1996 की बताई जा रही ये तस्वीरें उस समय की याद दिलाती हैं, जब नर्मदा घाटी में विकास, पर्यावरण, विस्थापन और जनाधिकारों को लेकर आंदोलन अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। उस दौर में सामाजिक कार्यकर्ताओं, ग्रामीणों और आंदोलन से जुड़े लोगों की भागीदारी ने नर्मदा से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई थी।

करीब तीन दशक बाद इन तस्वीरों का फिर सामने आना केवल अतीत की यादों को ताजा करना नहीं है, बल्कि उस संघर्षपूर्ण दौर की ओर भी ध्यान खींचता है, जब नर्मदा घाटी के लोगों के भविष्य और अधिकारों को लेकर बड़े सवाल उठ रहे थे। नाना पाटेकर के निधन के बीच छोटी कसरावद की ये तस्वीरें एक बार फिर याद दिला रही हैं कि कुछ यादें समय के साथ धुंधली जरूर पड़ती हैं, लेकिन इतिहास के महत्वपूर्ण पल लोगों की स्मृतियों में हमेशा जीवित रहते हैं।
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