‘भुवनेश्वर को चुनकर कोई एहसान नहीं किया’ पर, वसीम जाफर ने कहा : अनुभव और युवा जोश के संतुलन की पैरवी, बोले- लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को उम्र के आधार पर नजरअंदाज करना सही नहीं
Shiv Kumar Upwal
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम में अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की वापसी ने एक बार फिर टीम चयन में उम्र बनाम अनुभव की बहस को हवा दे दी है। न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी पांच मैचों की टी20 सीरीज के लिए 36 वर्षीय भुवनेश्वर कुमार को भारतीय टीम में शामिल किया गया है। उनके चयन का पूर्व भारतीय बल्लेबाज वसीम जाफर ने खुलकर समर्थन किया है।
जाफर ने सवाल उठाया कि जब भुवनेश्वर जैसे अनुभवी गेंदबाज लगातार अपनी उपयोगिता साबित कर सकते हैं, तो उन्हें इतने लंबे समय तक टीम से बाहर रखने का आखिर क्या औचित्य था। उनका मानना है कि किसी खिलाड़ी की उम्र को उसके चयन का एकमात्र आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
युवा खिलाड़ियों के साथ अनुभव भी जरूरी
वसीम जाफर ने भारतीय टीम में युवा और अनुभवी खिलाड़ियों के बीच संतुलन को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि युवा प्रतिभाओं को अवसर मिलना जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर लंबे समय तक अच्छा प्रदर्शन करने वाले अनुभवी खिलाड़ियों को नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
भुवनेश्वर कुमार लंबे समय से भारतीय क्रिकेट के लिए उपयोगी तेज गेंदबाज रहे हैं। खासकर नई गेंद से स्विंग कराने और शुरुआती ओवरों में विकेट निकालने की उनकी क्षमता को देखते हुए उनका अनुभव टीम के लिए अहम साबित हो सकता है।
उम्र नहीं, प्रदर्शन होना चाहिए पैमाना
जाफर के बयान का मूल संदेश यही है कि टीम चयन में उम्र से ज्यादा खिलाड़ी का मौजूदा प्रदर्शन, फिटनेस और टीम की जरूरत मायने रखनी चाहिए। यदि कोई अनुभवी क्रिकेटर अपनी क्षमता और फिटनेस साबित कर रहा है, तो केवल उम्र अधिक होने के कारण उसे दरकिनार करना चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर सकता है।
भुवनेश्वर की वापसी ने अब यह बहस भी तेज कर दी है कि भारतीय क्रिकेट में अनुभवी खिलाड़ियों के लिए चयन का दरवाजा कितना खुला है। न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में उनका प्रदर्शन यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है कि चयनकर्ताओं का यह फैसला कितना कारगर साबित होता है।
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