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कोठड़ा उपस्वास्थ्य केंद्र में ‘हाजिरी का खेल’! : ठेके की सफाई कर्मचारी महीने में सिर्फ 4 दिन? मेहनताना पूरे महीने का!

Shiv Kumar Upwal

1 month ago 325 views
ठेके की सफाई कर्मचारी महीने में सिर्फ 4 दिन? मेहनताना पूरे महीने का!

जून-जुलाई में पूरी हाजिरी, अगस्त में रजिस्टर पर कई जगह सन्नाटा... सीएचओ बोले—‘कभी-कभी आती हैं’, फिर किस आधार पर चल रहा भुगतान?

शिव उपवाल,...✍️

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निसरपुर,धार। सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की चमकती तस्वीरों के पीछे अगर कागज और जमीन की हकीकत अलग-अलग हो, तो सवाल उठना लाजमी है। उपस्वास्थ्य केंद्र कोठड़ा में ठेके पर कार्यरत सफाई कर्मचारी की कथित कम उपस्थिति ने विभागीय निगरानी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

आरोप है कि सफाई कर्मचारी पूरे महीने में महज चार दिन ही कार्यस्थल पर उपस्थित होती हैं, जबकि पूरे माह के भुगतान को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है—जब कर्मचारी नियमित रूप से मौजूद नहीं थी, तो हाजिरी और भुगतान का हिसाब कैसे बना?

रजिस्टर के पन्ने लाल... सवाल बेहिसाब!

उपस्थिति रिकॉर्ड की जानकारी के अनुसार जून और जुलाई में पूर्ण उपस्थिति दर्ज दिखाई देती है। वहीं अगस्त माह में कई जगह कर्मचारी के हस्ताक्षर नहीं हैं और अनुपस्थिति के सामने अवकाश दर्ज होने की बात भी सामने नहीं आती।

फिर सवालों की कतार खड़ी है—

हाजिरी किसने देखी?,रिकॉर्ड,किसने प्रमाणित किया?,ठेकेदार ने बिल किस आधार पर लगाया?,और भुगतान किस सत्यापन के बाद हुआ?

सीएचओ का बयान बढ़ा रहा सवालों की गर्मी

जब उपस्वास्थ्य केंद्र कोठड़ा के संस्था प्रमुख सीएचओ डॉ. प्रवीण गंधवानी से कर्मचारी की उपस्थिति के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कैमरे के सामने बताया कि संबंधित कर्मचारी कभी-कभी आती हैं।

यदि यह बयान रिकॉर्ड पर है, तो अब विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि वास्तविक उपस्थिति और रजिस्टर में दर्ज उपस्थिति का मिलान कैसे किया गया।

बीएमओ बोले—‘सीएचओ से संपर्क करता हूं’

मामले को लेकर बीएमओ डॉ. जितेंद्र दूधी से फोन पर संपर्क किया गया। उन्होंने कहा कि वे इस संबंध में सीएचओ से संपर्क करेंगे।

लेकिन जनता का सवाल इससे आगे है—

सिर्फ संपर्क होगा या जांच भी?

क्योंकि मामला सरकारी स्वास्थ्य केंद्र और ठेके पर कार्यरत कर्मचारी की उपस्थिति एवं भुगतान से जुड़ा है।

अब खुलेगा भुगतान का हिसाब!

अगर जांच में यह साबित होता है कि कर्मचारी ने निर्धारित कार्यदिवसों के अनुसार काम नहीं किया और फिर भी पूरे माह का भुगतान किया गया, तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि बिल किसने बनाया, सत्यापन किसने किया और भुगतान किस आधार पर स्वीकृत हुआ।

और यदि आरोप गलत हैं, तो विभाग को रिकॉर्ड सामने रखकर स्थिति साफ करनी चाहिए।

जांच के घेरे में कौन-कौन से रिकॉर्ड?

 उपस्थिति रजिस्टर,ठेकेदार के बिल,भुगतान रिकॉर्ड,कर्मचारी की वास्तविक उपस्थिति, संबंधित अधिकारी का सत्यापन, सफाई कार्य की निगरानी व्यवस्था

इन सभी का मिलान ही बताएगा कि मामला सिर्फ आरोप है या रिकॉर्ड में भी कोई गड़बड़ी सामने आती है।

खड़ी कलम का सीधा सवाल

चार दिन की हाजिरी... पूरे महीने का हिसाब?

कागज पर कर्मचारी मौजूद और मौके पर ‘कभी-कभी’—तो फिर निगरानी किसकी?

अगर सब कुछ नियम के मुताबिक है तो रिकॉर्ड सार्वजनिक जांच के लिए सामने क्यों न आए?

अब गेंद स्वास्थ्य विभाग के पाले में है।

जनता इंतजार कर रही है कि विभाग इस मामले में निष्पक्ष जांच कर सच सामने लाता है या फिर ‘कभी-कभी’ की कहानी सरकारी फाइलों में भी कभी-कभी ही दिखाई देगी।

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