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मेघनाथ घाट पर मंत्री का दौरा, लेकिन संगठन की कमजोर मौजूदगी ने खड़े किए : क्रूज प्रोजेक्ट से ज्यादा चर्चा कार्यक्रम की फीकी तस्वीर की, चंद कार्यकर्ताओं की उपस्थिति से स्थानीय संगठन की सक्रियता पर उठे प्रश्न

Shiv Kumar Upwal

1 month ago 467 views
क्रूज प्रोजेक्ट से ज्यादा चर्चा कार्यक्रम की फीकी तस्वीर की, चंद कार्यकर्ताओं की उपस्थिति से स्थानीय संगठन की सक्रियता पर उठे प्रश्न

शिवकुमार उपवाल,999399544..✍️

निसरपुर,धार 02 अगस्त। मेघनाथ घाट स्थित प्रस्तावित क्रूज पोर्ट निर्माण कार्यों के निरीक्षण के लिए केंद्रीय राज्य मंत्री एवं सांसद सावित्री ठाकुर का दौरा क्षेत्र के विकास की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा था। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी पर्यटन परियोजना से जुड़े इस दौरे को लेकर स्थानीय स्तर पर बड़े आयोजन और व्यापक जनसंपर्क की उम्मीद की जा रही थी। लेकिन कार्यक्रम समाप्त होने के बाद जिस बात की सबसे अधिक चर्चा रही, वह विकास योजनाएं नहीं बल्कि आयोजन की फीकी तस्वीर और कार्यकर्ताओं की सीमित मौजूदगी रही।

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कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर ने निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया, संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर गुणवत्ता और समयबद्ध निर्माण के निर्देश दिए। मां नर्मदा का पूजन-अर्चन किया और स्थानीय नागरिकों की वर्षों पुरानी श्मशान घाट की मांग पर आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया। विकास के लिहाज से यह दौरा सकारात्मक संदेश देने वाला था, लेकिन संगठनात्मक स्तर पर कई सवाल पीछे छोड़ गया।

चंद कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने बढ़ाई चर्चा

राजनीतिक हलकों में सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर रही कि केंद्रीय मंत्री के दौरे जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम में अपेक्षित संख्या में कार्यकर्ता और स्थानीय पदाधिकारी नजर क्यों नहीं आए। चंद कार्यकर्ताओं की उपस्थिति मंडल स्तर की कार्यशैली और संगठनात्मक समन्वय पर सवाल खड़े करती दिखाई दी। स्थानीय स्तर पर लोगों के बीच यह चर्चा रही कि इतने महत्वपूर्ण अवसर पर यदि संगठन पूरी ताकत के साथ नजर नहीं आया, तो इसकी वजह क्या रही?

क्या तैयारी में रह गई कमी?

कई राजनीतिक जानकारों का मानना है कि किसी केंद्रीय मंत्री के दौरे में भीड़ केवल संख्या का विषय नहीं होती, बल्कि वह संगठन की सक्रियता, समन्वय और नेतृत्व क्षमता का भी संकेत देती है। ऐसे आयोजनों में यदि कार्यकर्ताओं की भागीदारी अपेक्षा से कम दिखाई दे, तो स्वाभाविक रूप से संगठनात्मक तैयारियों पर चर्चा शुरू हो जाती है।

स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या कार्यक्रम की सूचना सभी कार्यकर्ताओं तक समय पर पहुंची थी? क्या संगठनात्मक समन्वय पर्याप्त था? क्या सभी पदाधिकारियों की जिम्मेदारियां स्पष्ट थीं? इन सवालों के जवाब भले ही अभी सामने न आए हों, लेकिन चर्चा जरूर तेज हो गई है।

विकास के मुद्दे पर मंत्री का स्पष्ट संदेश

केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर ने निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि क्रूज पोर्ट निर्माण कार्य गुणवत्ता से समझौता किए बिना समय पर पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि मेघनाथ घाट क्रूज परियोजना क्षेत्र के पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाली योजना है। साथ ही उन्होंने श्मशान घाट निर्माण की स्थानीय मांग को भी उचित बताते हुए समाधान का भरोसा दिलाया।

क्रूज परियोजना से जुड़ी बड़ी उम्मीदें

मेघनाथ घाट से गुजरात के स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक प्रस्तावित लगभग 135 किलोमीटर लंबी क्रूज सेवा मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग की महत्वाकांक्षी योजना है। परियोजना के पूरा होने से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलने, स्थानीय व्यापार को गति मिलने और रोजगार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद जताई जा रही है। ऐसे में इस परियोजना से जुड़े हर कार्यक्रम पर स्वाभाविक रूप से लोगों और राजनीतिक दलों की नजर रहती है।

सवाल जिनके जवाब अभी बाकी हैं

कार्यक्रम समाप्त हो गया, लेकिन कई सवाल पीछे छोड़ गया। क्या भविष्य में संगठन बड़े कार्यक्रमों में बेहतर समन्वय स्थापित कर पाएगा? क्या स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने के लिए नई रणनीति बनाई जाएगी? क्या इस आयोजन की समीक्षा होगी?

इन सवालों के जवाब आने वाला समय देगा, लेकिन फिलहाल इतना तय है कि मेघनाथ घाट का यह दौरा विकास कार्यों के साथ-साथ स्थानीय संगठन की कार्यशैली को लेकर भी व्यापक चर्चा का विषय बन गया है।

खड़ी कलम:

"विकास की योजनाएं जितनी मजबूत हों, उन्हें जन-जन तक पहुंचाने के लिए उतना ही मजबूत संगठन भी जरूरी होता है। बड़े मंच पर कमजोर मौजूदगी कई बार सबसे बड़ा संदेश छोड़ जाती है।"

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