40 करोड़ की सड़क सालभर में ध्वस्त? : स्मार्ट सिटी के विकास पर उठे सवाल, MIC सदस्य राजेंद्र राठौर का बड़ा हमला—“लंदन जैसा इंदौर बनाने के सपने दिखाए, सड़कें बनाने गुजरात से ठेकेदार बुलाए”
Shiv Kumar Upwal
इंदौर,18अगस्त। स्मार्ट सिटी के नाम पर विकास की चमक दिखाने वाले इंदौर में अब सड़क की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 40 करोड़ रुपए की लागत से बनी बताई जा रही सड़क के निर्माण के लगभग एक साल के भीतर ही सड़क की सतह उखड़ने और टूटने का वीडियो सामने आया है। वीडियो में सड़क पर जगह-जगह उखड़ी परत, बिखरा निर्माण मटेरियल और बारिश के बाद बिगड़ी हालत दिखाई दे रही है।
सड़क की यह तस्वीर सामने आने के बाद स्मार्ट सिटी के कामों की गुणवत्ता पर बहस छिड़ गई है। मामला तब और गरमा गया, जब MIC सदस्य राजेंद्र राठौर ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली और निर्माण व्यवस्था पर तीखा हमला बोला।
राठौर के बयान के मुताबिक, स्मार्ट सिटी के नाम पर अधिकारियों ने इंदौर को “लंदन जैसा” बनाने के बड़े-बड़े सपने दिखाए थे। उनका कहना है कि सड़क निर्माण के लिए गुजरात से ठेकेदार बुलाए गए, जबकि ऐसी सड़कें इंदौर के स्थानीय ठेकेदार भी बना सकते थे। राठौर ने तंज कसते हुए कहा कि “इंदौर के पप्पू ठेकेदार ही बना देते।”

सड़क टूटी तो सवाल भी खड़े हुए
सवाल सीधा है—अगर सड़क निर्माण पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए हैं तो एक साल के भीतर उसकी परत क्यों उखड़ रही है? क्या निर्माण के दौरान गुणवत्ता के मानकों की सही तरीके से निगरानी हुई? क्या ठेकेदार को भुगतान से पहले निर्माण की गुणवत्ता की पर्याप्त जांच की गई थी?
वीडियो में सड़क की खराब होती स्थिति ने इन सवालों को और हवा दे दी है।
“अधिकारियों ने 1000 करोड़ का चूना लगाया”—राठौर का आरोप
MIC सदस्य राजेंद्र राठौर ने इंदौर में स्मार्ट सिटी और विकास कार्यों को लेकर अधिकारियों पर करीब 1000 करोड़ रुपए के नुकसान का गंभीर आरोप लगाया है। हालांकि यह आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि जांच या आधिकारिक दस्तावेजों से होना बाकी है।
लेकिन राठौर के बयान ने नगर निगम और स्मार्ट सिटी से जुड़े निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, लागत और निगरानी व्यवस्था को सीधे सवालों के घेरे में ला दिया है।

लंदन जैसा शहर बनाने का सपना... सड़क की हकीकत सामने!
जिस इंदौर को स्मार्ट सिटी बनाकर विश्वस्तरीय सुविधाएं देने के दावे किए गए, वहां यदि करोड़ों की सड़क इतनी जल्दी खराब होती दिखाई देती है तो सवाल सिर्फ एक सड़क का नहीं है।
सवाल उस पूरी व्यवस्था का है, जिसमें करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी सड़क की उम्र पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब जरूरत सिर्फ बयानबाजी की नहीं, बल्कि निर्माण की तकनीकी जांच, गुणवत्ता परीक्षण, भुगतान की जांच और जिम्मेदारी तय करने की है।
सबसे बड़ा सवाल:-
40 करोड़ की सड़क—एक साल में खराब कैसे?
जिम्मेदार कौन?
गुणवत्ता की जांच किसने की?
और यदि आरोप सही हैं तो करोड़ों के इस कथित नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
इंदौर की स्मार्ट सिटी की चमक के बीच सड़क की यह तस्वीर अब सिस्टम के लिए आईना बन गई है।
विज्ञापन
सुरक्षा के साथ यातायात व्यवस्था में मुस्तैद रही पुलिस
निसरपुर में भाजपा के शक्ति प्रदर्शन की खुली पोल?
प्राथमिक विद्यालय रामपुरा की बालसभा में बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा ने मोहा मन, कल्पना शाह के मार्गदर्शन में दिखा नवाचार का अनूठा रंग
दिन में बार-बार बिजली गुल, रात में भी नहीं मिल रही नियमित आपूर्ति; बिजली कंपनी के अधिकारियों को सौंपा ज्ञापन
21 दिसंबर 1996 की आमसभा में उमड़ा था जनसैलाब, बाबा आमटे की मौजूदगी से जुड़ी हैं तस्वीरें; तीन दशक पुराने नर्मदा बचाओ आंदोलन के दौर की यादें फिर हुईं जीवंत
अनुभव और युवा जोश के संतुलन की पैरवी, बोले- लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को उम्र के आधार पर नजरअंदाज करना सही नहीं
निधन की खबर से हिंदी और मराठी फिल्म जगत में शोक की लहर
लिंगवा गांव में खेत की जाली काटकर दिया था वारदात को अंजाम, चार अन्य आरोपी फरार
20 लाख लीटर क्षमता का जल भंडारण, लेकिन छह दिनों से बूंद-बूंद पानी को तरस रहे विस्थापित; ‘मोटर जल गई’ का रटा-रटाया जवाब देकर जिम्मेदारों ने झाड़ा पल्ला!
राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से पहले सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हुआ विवाद, सज्जन सिंह वर्मा के तीखे बोलों ने बढ़ाई हलचल