बड़ी खबरें
सुरक्षा के साथ यातायात व्यवस्था में मुस्तैद रही पुलिस निसरपुर में भाजपा के शक्ति प्रदर्शन की खुली पोल? प्राथमिक विद्यालय रामपुरा की बालसभा में बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा ने मोहा मन, कल्पना शाह के मार्गदर्शन में दिखा नवाचार का अनूठा रंग दिन में बार-बार बिजली गुल, रात में भी नहीं मिल रही नियमित आपूर्ति; बिजली कंपनी के अधिकारियों को सौंपा ज्ञापन 21 दिसंबर 1996 की आमसभा में उमड़ा था जनसैलाब, बाबा आमटे की मौजूदगी से जुड़ी हैं तस्वीरें; तीन दशक पुराने नर्मदा बचाओ आंदोलन के दौर की यादें फिर हुईं जीवंत अनुभव और युवा जोश के संतुलन की पैरवी, बोले- लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को उम्र के आधार पर नजरअंदाज करना सही नहीं निधन की खबर से हिंदी और मराठी फिल्म जगत में शोक की लहर लिंगवा गांव में खेत की जाली काटकर दिया था वारदात को अंजाम, चार अन्य आरोपी फरार 20 लाख लीटर क्षमता का जल भंडारण, लेकिन छह दिनों से बूंद-बूंद पानी को तरस रहे विस्थापित; ‘मोटर जल गई’ का रटा-रटाया जवाब देकर जिम्मेदारों ने झाड़ा पल्ला! राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से पहले सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हुआ विवाद, सज्जन सिंह वर्मा के तीखे बोलों ने बढ़ाई हलचल
Trending

चाटुकारिता छोड़िए, जमीन पर उतरिए,नहीं तो दतिया जैसा हाल पूरे प्रदेश मे : भाजपा कार्यकर्ता अभय (अंतिम पटेल) सिंह पटेल की सोशल मीडिया पोस्ट ने संगठन की कार्यशैली पर उठाए तीखे सवाल;

Shiv Kumar Upwal

1 month ago 696 views
भाजपा कार्यकर्ता अभय (अंतिम पटेल) सिंह पटेल की सोशल मीडिया पोस्ट ने संगठन की कार्यशैली पर उठाए तीखे सवाल;

भाजपा कार्यकर्ता अभय (अंतिम पटेल) सिंह पटेल की सोशल मीडिया पोस्ट ने संगठन की कार्यशैली पर उठाए तीखे सवाल; कार्यकर्ताओं की उपेक्षा को लेकर नेताओं को आईना दिखाने की कोशिश...

निसरपुर,धार 26अगस्त। चुनावी मौसम में गली-गली, घर-घर पहुंचकर वोट मांगने वाला कार्यकर्ता क्या चुनाव जीतने के बाद भी उतना ही महत्वपूर्ण रहता है? इसी सवाल को लेकर ग्राम पंचायत निसरपुर के सरपंच एवं भाजपा कार्यकर्ता अभय सिंह (अंतिम) पटेल की फेसबुक पोस्ट ने राजनीतिक हलकों में चर्चा छेड़ दी है।

Advertisement

अपने सोशल मीडिया पोस्ट में पटेल ने लिखा कि चुनाव के दौरान नेता कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के घर पहुंचकर समर्थन मांगते हैं, लेकिन सत्ता हासिल होने के बाद वही कार्यकर्ता और उनकी समस्याएं पीछे छूट जाती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि समस्याएं लेकर पहुंचने वाले कार्यकर्ताओं को कई बार नेताओं तक पहुंचने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

“जीत जिस गली और कार्यकर्ता से मिली, उसे भूलना भारी पड़ सकता है”

पटेल ने अपनी पोस्ट में कार्यकर्ताओं की नाराजगी को सामने रखते हुए लिखा कि जीत जिस गली, जिस घर, जिस मतदाता और जिस कार्यकर्ता से मिलती है, सत्ता में आने के बाद उन्हें अपना बनाने की जिम्मेदारी भी नेतृत्व की है।

उन्होंने नेताओं को सलाह देते हुए कहा कि “चाटुकारिता छोड़ो, जमीन पर चलो… मंच, भाषण, माला और रील से बाहर निकलकर कार्यकर्ता, मतदाता और गांव-नगर की समस्याओं के बीच पहुंचो।”

रील और माला की राजनीति से जमीन की राजनीति तक आने की नसीहत

पोस्ट में पटेल ने संगठन और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कार्यकर्ता केवल चुनाव के समय दिखाई देने वाला चेहरा नहीं है। उसके क्षेत्र की समस्याओं को सुनना और उनका समाधान करना भी राजनीतिक नेतृत्व की जिम्मेदारी है।

उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में लिखा कि यदि कार्यकर्ताओं की नाराजगी और उपेक्षा को समय रहते दूर नहीं किया गया तो आने वाले चुनावों में इसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

“दतिया जैसा हाल पूरे मध्यप्रदेश में हो जाएगा”

पोस्ट की सबसे तीखी पंक्तियों में पटेल ने दतिया उपचुनाव के परिणाम का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि कार्यकर्ताओं और संगठन की नाराजगी को गंभीरता से नहीं लिया गया तो ऐसा ही राजनीतिक परिणाम अन्य क्षेत्रों में भी देखने को मिल सकता है।

उन्होंने अपनी बात को “मेरी नहीं, सैकड़ों कार्यकर्ताओं की दिल की आवाज” बताते हुए संगठन के भीतर जमीनी कार्यकर्ताओं की भूमिका और सम्मान को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

सीधी बात:

चुनाव में कार्यकर्ता चाहिए, सत्ता में कार्यकर्ता की आवाज चाहिए और हार के बाद कार्यकर्ता की नाराजगी भी समझनी होगी। मंच की तालियां और सोशल मीडिया की रीलें संगठन का विकल्प नहीं हो सकतीं। असली ताकत आज भी उसी कार्यकर्ता के पास है, जो चुनाव के दिन नहीं बल्कि पांच साल जमीन पर खड़ा रहता है।

शेयर करें

विज्ञापन

Advertisement
Advertisement

जरूरी खबरें

संबंधित खबरें

52
पेज 4 / 9