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तबादला नीति फेल या संरक्षण का खेल? : निसरपुर ब्लॉक के आश्रम-छात्रावासों में वर्षों से जमे अधीक्षक, जवाब मांग रही जनता

Shiv Kumar Upwal

2 days ago 119 views
निसरपुर ब्लॉक के आश्रम-छात्रावासों में वर्षों से जमे अधीक्षक, जवाब मांग रही जनता

शिवकुमार उपवाल,9993990544....✍️

निसरपुर,धार 11 जुलाई 2026 । प्रदेश सरकार हर वर्ष पारदर्शी प्रशासन और सुशासन के दावे करती है। अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए तबादला नीति भी लागू होती है, ताकि लंबे समय तक एक ही स्थान पर जमे रहने से उत्पन्न होने वाली अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके। लेकिन **निसरपुर ब्लॉक के कई आश्रम एवं छात्रावासों में वर्षों से एक ही स्थान पर जमे अधीक्षकों** को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि यहां सरकारी तबादला नीति केवल कागजों तक सीमित होकर रह गई है।

सूत्रों के अनुसार कई अधीक्षक वर्षों से एक ही संस्था में पदस्थ हैं, जबकि नियमों के अनुसार समय-समय पर स्थानांतरण होना चाहिए। इसके बावजूद वर्षों से उनकी पदस्थापना जस की तस बनी हुई है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

क्या तबादला नीति सिर्फ दिखावा है?

यदि शासन की तबादला नीति सभी कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होती है, तो फिर वर्षों से एक ही स्थान पर जमे इन अधीक्षकों पर यह नियम क्यों लागू नहीं हो रहा? आखिर ऐसा कौन-सा संरक्षण या प्रभाव है, जिसके कारण वर्षों से इनका स्थानांतरण नहीं हो पा रहा?

जनता पूछ रही है...

* आखिर वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ अधीक्षकों का संरक्षण कौन कर रहा है?

* क्या तबादला नीति केवल चुनिंदा कर्मचारियों के लिए ही लागू होती है?

* क्या लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ रहने की विभागीय अनुमति है?

* क्या संबंधित विभाग ने कभी इन मामलों की समीक्षा की है?

* यदि नहीं, तो आखिर क्यों?

पारदर्शिता पर उठे सवाल

लंबे समय तक एक ही संस्था में पदस्थ रहने से प्रशासनिक निष्पक्षता प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। यही कारण है कि शासन समय-समय पर स्थानांतरण नीति लागू करता है। यदि किसी कर्मचारी को विशेष परिस्थितियों में रोका जाता है, तो उसका स्पष्ट प्रशासनिक आधार भी होना चाहिए। ऐसे में वर्षों से एक ही स्थान पर जमे अधिकारियों को लेकर स्वाभाविक रूप से सवाल उठ रहे हैं।

जांच की उठी मांग

स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि आश्रम-छात्रावासों में वर्षों से जमे अधीक्षकों की सूची सार्वजनिक कर यह स्पष्ट किया जाए कि किन परिस्थितियों में उन्हें लगातार एक ही स्थान पर पदस्थ रखा गया। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यदि किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों की अनदेखी सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

जब सरकार की तबादला नीति हर वर्ष लागू होती है, तब कुछ लोग वर्षों तक एक ही कुर्सी पर कैसे जमे रहते हैं? यदि नियम सभी के लिए समान हैं, तो अपवाद किस आधार पर बनाए जा रहे हैं? अब जरूरत इस बात की है कि विभाग इस पूरे मामले पर पारदर्शी जवाब दे, ताकि सुशासन के दावों पर जनता का भरोसा कायम रह सके।

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